Privilege















मैंने वह देखा है,
जो शायद तुमने भी देखा होगा
सड़क के उस पार
कुछ दिल भी देखे होंगे तुमने,
जो अपनी भूख के लिए
खुद को भगवान बना बैठे।

पर दोष उनका नहीं था,
सोचता हूँ कभी
भगवान ने उन्हें
इंसान बनाकर इस दुनिया में
क्यों भेज दिया?

वो इंसान भी क्या करे,
जिसे कोसने के सिवा
कुछ और सिखाया ही नहीं गया,
जिसे अपने ही दर्द में
खुद को झोंक ही दे दिया।

और इधर हम हैं,
इतने विशेषाधिकार लेकर भी,
जैसे दुनिया से,
कोई बदला ले रहे हों।

पर क्या हमने कभी,
ठहर कर यह सोचा है,
इतना कुछ पाकर भी,
हमने सीखा क्या है ?

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